कोशिका संरचना व कार्य — NEET कक्षा 11 रिवीज़न
पूरा NEET कोशिका संरचना व कार्य अध्याय एक जगह: कोशिका, उसके कोशिकांगों, प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक कोशिकाओं और कोशिका चक्र पर अवधारणा नोट्स, अंतर सारणियाँ, सबसे ज़्यादा गलत होने वाली शंकाएँ, त्वरित-स्मरण तथ्य।
मुख्य अवधारणाएँ
इस इकाई में प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाएँ, पादप और जंतु कोशिकाएँ, कोशिका आवरण और कोशिकांग, जैव-अणु और एंज़ाइम, तथा कोशिका चक्र, समसूत्रण, अर्धसूत्रण और उनका जैविक महत्व शामिल है।
कोशिका सिद्धांत
श्लाइडेन और श्वान ने प्रस्तावित किया कि जीव कोशिकाओं से बने हैं; विरखो ने जोड़ा कि नई कोशिकाएँ पूर्व-विद्यमान कोशिकाओं से बनती हैं।
- कोशिका = संरचनात्मक और क्रियात्मक मूल इकाई
- Omnis cellula e cellula
प्रोकैरियोटिक बनाम यूकैरियोटिक कोशिका
प्रोकैरियोट में झिल्लीबद्ध केंद्रक और कोशिकांग नहीं होते; यूकैरियोट में दोनों पाए जाते हैं।
- प्रोकैरियोट: केंद्रकाभ, 70S राइबोसोम
- यूकैरियोट: सच्चा केंद्रक, झिल्लीबद्ध कोशिकांग
पादप बनाम जंतु कोशिका
पादप कोशिका में सेलुलोज की कोशिका भित्ति, प्लास्टिड और सामान्यतः बड़ी केंद्रीय रिक्तिका होती है। जंतु कोशिका में कोशिका भित्ति और प्लास्टिड नहीं होते तथा सेंट्रिओल सामान्यतः उपस्थित होते हैं।
- पादप: कोशिका भित्ति + प्लास्टिड + बड़ी रिक्तिका
- जंतु: सेंट्रिओल सामान्यतः उपस्थित, सेलुलोज भित्ति नहीं
कोशिका झिल्ली
प्लाज्मा झिल्ली लिपिड और प्रोटीन से बनी चयनात्मक पारगम्य झिल्ली है, जिसकी संरचना को तरल-मोज़ेक मॉडल द्वारा समझाया जाता है।
- फॉस्फोलिपिड द्विस्तर + प्रोटीन
- कोशिका में पदार्थों के प्रवेश और निकास को नियंत्रित करती है
कोशिका भित्ति और कोशिका आवरण
पादप कोशिका भित्ति मुख्यतः सेलुलोज की बनी होती है और कोशिका को आकार तथा सुरक्षा देती है। जीवाणु कोशिका आवरण में ग्लाइकोकैलिक्स, कोशिका भित्ति और प्लाज्मा झिल्ली शामिल होते हैं।
- मध्य पटल में कैल्सियम पेक्टेट अधिक मात्रा में होता है
- जीवाणु आवरण: ग्लाइकोकैलिक्स + कोशिका भित्ति + प्लाज्मा झिल्ली
अंतःझिल्ली तंत्र
अंतःप्रद्रव्यी जालिका, गॉल्जी तंत्र, लाइसोसोम और रिक्तिकाएँ मिलकर संश्लेषण, संशोधन, संवेष्टन, पाचन और भंडारण के कार्य करती हैं।
- खुरदरी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (RER): प्रोटीन संश्लेषण · चिकनी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (SER): लिपिड संश्लेषण/विषहरण
- गॉल्जी तंत्र: संशोधन/छँटाई/संवेष्टन
- लाइसोसोम: जल-अपघटनी एंजाइम
माइटोकॉन्ड्रिया
माइटोकॉन्ड्रिया दोहरी झिल्ली वाले अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग हैं। भीतरी झिल्ली क्रिस्टी बनाती है और मैट्रिक्स में एंजाइम, DNA व राइबोसोम पाए जाते हैं।
- वायवीय ATP उत्पादन
- अपना DNA और 70S-जैसे राइबोसोम
प्लास्टिड
हरितलवक में स्ट्रोमा के भीतर थायलाकोइड ग्रैना के रूप में व्यवस्थित होते हैं। वर्णीलवक में रंगीन वर्णक और अवर्णीलवक में भोजन का भंडारण होता है।
- हरितलवक: प्रकाश-संश्लेषण
- अवर्णीलवक: अमाइलोप्लास्ट/इलायोप्लास्ट/एल्यूरोप्लास्ट
राइबोसोम
राइबोसोम बिना झिल्ली वाले प्रोटीन-संश्लेषण स्थल हैं। यूकैरियोटिक कोशिकाद्रव्य में 80S, जबकि प्रोकैरियोट, माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक में 70S राइबोसोम पाए जाते हैं।
- 80S = 60S + 40S
- 70S = 50S + 30S
कोशिका कंकाल, सिलिया और फ्लैजेला
सूक्ष्मनलिकाएँ, सूक्ष्मतंतु और मध्यवर्ती तंतु कोशिका के आकार और गति में सहायता करते हैं। यूकैरियोटिक पक्ष्म और कशाभ में 9+2 एक्सोनीम व्यवस्था होती है।
- पक्ष्म/कशाभ: 9 परिधीय सूक्ष्मनलिका-द्विक + 2 केंद्रीय सूक्ष्मनलिकाएँ
तारककेंद्र और सेंट्रिओल
एक तारककेंद्र में सामान्यतः दो सेंट्रिओल एक-दूसरे के प्रति समकोण पर स्थित होते हैं। प्रत्येक सेंट्रिओल में नौ परिधीय सूक्ष्मनलिका-त्रिक होते हैं और यह तर्कु तंतुओं के संगठन में सहायता करता है।
- सेंट्रिओल: 9 सूक्ष्मनलिका-त्रिक, केंद्रीय जोड़ी नहीं
केंद्रक
केंद्रक दोहरी केंद्रकीय झिल्ली, केंद्रकीय छिद्र, क्रोमैटिन और केंद्रिका से बना होता है। कोशिका विभाजन के समय क्रोमैटिन सघन होकर गुणसूत्र बनाता है।
- केंद्रिका: rRNA संश्लेषण/राइबोसोम संयोजन
- क्रोमैटिन = DNA + प्रोटीन
कार्बोहाइड्रेट
कार्बोहाइड्रेट में एकशर्कराएँ, अल्पशर्कराएँ और बहुशर्कराएँ शामिल हैं। वे ऊर्जा के स्रोत तथा संरचनात्मक पदार्थ दोनों के रूप में कार्य करते हैं।
- ग्लूकोज: एकशर्करा
- स्टार्च/ग्लाइकोजन: भंडारण · सेलुलोज: संरचनात्मक
प्रोटीन
प्रोटीन अमीनो अम्लों के बहुलक हैं, जिनमें अमीनो अम्ल पेप्टाइड बंध से जुड़े रहते हैं। प्रोटीन का कार्य उसकी प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और कभी-कभी चतुर्थक संरचना पर निर्भर करता है।
- पेप्टाइड बंध: –CO–NH–
- संरचना कार्य निर्धारित करती है
लिपिड
लिपिड जल में अघुलनशील जैव-अणु हैं, जिनमें वसा, फॉस्फोलिपिड और स्टेरॉयड शामिल हैं। फॉस्फोलिपिड कोशिका झिल्ली के प्रमुख घटक हैं।
- ट्राइग्लिसराइड = ग्लिसरॉल + 3 वसीय अम्ल
- फॉस्फोलिपिड झिल्ली का द्विस्तर बनाते हैं
न्यूक्लिक अम्ल
DNA और RNA न्यूक्लियोटाइड के बहुलक हैं। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में एक पेंटोज शर्करा, नाइट्रोजनी क्षारक और फॉस्फेट होता है।
- DNA: डीऑक्सीराइबोज + A,T,G,C
- RNA: राइबोज + A,U,G,C
एंज़ाइम
अधिकांश एंजाइम प्रोटीन होते हैं, जो सक्रियण ऊर्जा घटाकर अभिक्रिया की गति बढ़ाते हैं, परंतु साम्य नहीं बदलते। उनकी क्रिया तापमान, pH और क्रियाधार की सांद्रता से प्रभावित होती है।
- सक्रिय स्थल क्रियाधार से जुड़ता है
- एंज़ाइम विशिष्ट होते हैं और पुनः उपयोग हो सकते हैं
एंज़ाइम वर्ग
एंजाइमों का नाम और वर्गीकरण उनके द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रिया के आधार पर किया जाता है। पारंपरिक प्रमुख वर्ग हैं: ऑक्सीडोरिडक्टेज, ट्रांसफरेज, हाइड्रोलेज, लायेज, आइसोमेरेज और लाइगेज।
- एंजाइमों के नाम सामान्यतः ‘-ase’ प्रत्यय पर समाप्त होते हैं
कोशिका चक्र
कोशिका चक्र में अंतरावस्था (G1, S, G2) और M अवस्था शामिल हैं। DNA की प्रतिकृति S अवस्था में होती है, समसूत्रण के दौरान नहीं।
- G1 → S → G2 → M
- DNA की मात्रा S अवस्था में दोगुनी होती है
समसूत्रण
समसूत्रण एक समकारी विभाजन है जो दो आनुवंशिक रूप से समान संतति कोशिकाएँ बनाता है और गुणसूत्र संख्या बनाए रखता है। यह वृद्धि और ऊतक-मरम्मत में महत्वपूर्ण है।
- पूर्वावस्था → मध्यावस्था → पश्चावस्था → अंत्यावस्था
- 2 संतति कोशिकाएँ · वही गुणिता
अर्धसूत्रण
अर्धसूत्रण में DNA की एक बार प्रतिकृति के बाद दो विभाजन होते हैं। अर्धसूत्रण I न्यूनकारी और अर्धसूत्रण II समकारी होता है, जिससे चार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं।
- अर्धसूत्रण की पूर्वावस्था I: युग्मन + विनिमय
- अर्धसूत्रण I: समजात गुणसूत्र अलग होते हैं
- अर्धसूत्रण II: सहोदर क्रोमैटिड अलग होते हैं
अर्धसूत्रण का महत्व
अर्धसूत्रण युग्मकों में गुणसूत्र संख्या आधी करता है और विनिमय तथा स्वतंत्र अपव्यूहन से आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करता है। इससे पीढ़ियों में गुणसूत्र संख्या स्थिर बनी रहती है।
- आनुवंशिक विविधता + अगुणित युग्मक
कोशिका संरचनाओं और विभाजनों में अंतर पहचानिए
स्थान, संरचना और परिणाम पर ध्यान दीजिए।
राइबोसोम
| 70S | प्रोकैरियोटिक कोशिकाद्रव्य; माइटोकॉन्ड्रिया; हरितलवक |
| 80S | यूकैरियोटिक कोशिकाद्रव्य |
कोशिका चक्र
| G1 | कोशिका वृद्धि और सामान्य उपापचय |
| S | DNA प्रतिकृति |
| G2 | विभाजन की तैयारी |
| M | केंद्रक विभाजन + कोशिकाद्रव्य विभाजन |
महत्वपूर्ण अंतर
हर जोड़ी में निर्णायक अंतर याद रखिए।
प्रोकैरियोट बनाम यूकैरियोट ★
प्रोकैरियोट
- सच्चा केंद्रक नहीं
- झिल्लीबद्ध कोशिकांग नहीं
- 70S राइबोसोम
यूकैरियोट
- सच्चा केंद्रक
- झिल्लीबद्ध कोशिकांग
- कोशिकाद्रव्य में 80S राइबोसोम
खुरदरी बनाम चिकनी अंतःप्रद्रव्यी जालिका
खुरदरी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (RER)
- राइबोसोम जुड़े
- प्रोटीन संश्लेषण
- अक्सर केंद्रकीय झिल्ली से जुड़ा
चिकनी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (SER)
- राइबोसोम नहीं
- लिपिड संश्लेषण
- विषहरण
समसूत्रण बनाम अर्धसूत्रण ★
समसूत्रण
- एक विभाजन
- 2 समान संतति कोशिकाएँ
- गुणसूत्र संख्या बनी रहती है
अर्धसूत्रण
- दो विभाजन
- 4 विविध अगुणित कोशिकाएँ
- गुणसूत्र संख्या आधी
पक्ष्म/कशाभ बनाम सेंट्रिओल ★
पक्ष्म/कशाभ का एक्सोनीम
- 9+2 व्यवस्था
- गति
- सूक्ष्मनलिका-द्विक
सेंट्रिओल
- 9+0 व्यवस्था
- तर्कु संगठन
- सूक्ष्मनलिका-त्रिक
सामान्य NEET शंकाएँ
क्या प्रोकैरियोटिक कोशिका में केंद्रक न होने के कारण DNA भी नहीं होता?
नहीं। उसका DNA केंद्रकाभ में होता है; केवल केंद्रकीय झिल्ली नहीं होती।
क्या माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक पूरी तरह केंद्रकीय DNA पर निर्भर हैं?
नहीं। वे अर्ध-स्वायत्त हैं और अपना DNA व राइबोसोम रखते हैं, हालांकि उनके कई प्रोटीन केंद्रकीय जीनों से बनते हैं।
क्या लाइसोसोम अंतःझिल्ली तंत्र का भाग हैं?
हाँ। अंतःप्रद्रव्यी जालिका, गॉल्जी तंत्र, लाइसोसोम और रिक्तिकाएँ एकीकृत अंतःझिल्ली तंत्र के रूप में कार्य करती हैं।
क्या सभी लिपिड वास्तविक बहुलक हैं?
नहीं। लिपिड महत्वपूर्ण जैव-अणु हैं, परंतु प्रोटीन या न्यूक्लिक अम्ल की तरह बार-बार दोहराए जाने वाले एकलकों से बने वास्तविक बहुलक नहीं माने जाते।
क्या एंज़ाइम प्रतिकूल साम्य को अनुकूल बना सकता है?
नहीं। एंज़ाइम सक्रियण ऊर्जा घटाता है और साम्य तक पहुँचने की गति बढ़ाता है; वह ΔG या साम्य की स्थिति नहीं बदलता।
क्या DNA की प्रतिकृति समसूत्रण की पूर्वावस्था में होती है?
नहीं। DNA की प्रतिकृति समसूत्रण से पहले S अवस्था में होती है।
क्या पश्चावस्था I में सहोदर क्रोमैटिड अलग होते हैं?
नहीं। पश्चावस्था I में समजात गुणसूत्र अलग होते हैं; सहोदर क्रोमैटिड पश्चावस्था II में अलग होते हैं।
क्या अर्धसूत्रण हमेशा आनुवंशिक रूप से समान कोशिकाएँ बनाता है?
नहीं। विनिमय और स्वतंत्र अपव्यूहन आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करते हैं।
त्वरित स्मरण
प्र. कोशिका सिद्धांत एक पंक्ति में बताइए।
जीव कोशिकाओं से बने हैं; कोशिका जीवन की मूल इकाई है; नई कोशिकाएँ पूर्व-विद्यमान कोशिकाओं से बनती हैं।
प्र. अंतःझिल्ली तंत्र में कौन-से कोशिकांग शामिल हैं?
अंतःप्रद्रव्यी जालिका (ER), गॉल्जी तंत्र, लाइसोसोम और रिक्तिकाएँ।
प्र. प्रोकैरियोट में राइबोसोम का आकार क्या है?
70S; यूकैरियोटिक कोशिकाद्रव्य में 80S।
प्र. 9+2 व्यवस्था क्या है?
यूकैरियोटिक पक्ष्म और कशाभ के एक्सोनीम की सूक्ष्मनलिका व्यवस्था।
प्र. पेप्टाइड बंध क्या है?
प्रोटीन में अमीनो अम्लों को जोड़ने वाला –CO–NH– बंध।
प्र. एक न्यूक्लियोटाइड के तीन भाग कौन-से हैं?
पेंटोज शर्करा, नाइट्रोजनी क्षारक और फॉस्फेट।
प्र. कोशिका चक्र की किस अवस्था में DNA प्रतिकृति होती है?
S अवस्था।
प्र. अर्धसूत्रण I में क्या अलग होता है?
समजात गुणसूत्र।
प्र. अर्धसूत्रण II में क्या अलग होता है?
सहोदर क्रोमैटिड।
प्र. अर्धसूत्रण जैविक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अगुणित युग्मक और आनुवंशिक विविधता बनाता है तथा पीढ़ियों में गुणसूत्र संख्या स्थिर रखता है।
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